सचिन मैडम तुस्साद मैं



विवियन रिचर्ड्स... ब्रायन चार्ल्स लारा... शेन वार्न... क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर इन दिग्गजों की जमात में हमेशा रहेंगे... अमिताभ, शाहरुख, सलमान, एश्वर्या... शोहरत के पैमाने पर सचिन का कद इन सितारों से कम नहीं... अब क्रिकेट का मास्टर मोम में ढलकर इन तमाम दिग्गजों की जमात में सजेगा...

वो महज पांच फुट पांच इंच होकर भी साख में बिग बी के कद की बराबरी करता है...
वो इन दिग्गजों के बीच इन्ही जैसा एक सितारा है... वो इन दिग्गजों के साथ लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम की शान बनेगा...
क्रिकेट का मास्टर अब मोम में ढलकर, महारथियों के महल का एक और महान वासिंदा बनेगा...
जी हां, लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम में सज रही है सचिन रमेश तेंदुलकर की भी मूर्ती...
क्रिकेट का भगवान कहते है इस शख्स को... भगवान की मुर्ती, भगवान की सूरत से कहीं जुदा न हो जाए... तुसाड म्यूजियम के कलाकार इस कोशिश में मुंबई तक पहुंचे हैं... नैन-नक्श के 200 नाप लिए गए हैं मास्टर के अक्श को मोम में ढालने के लिए...

पूरा नाम सचिन रमेश तेंदुलकर.....इस नाम में सचिन के पिता का नाम छुपा है...और पिता रमेश तेंदुलकर ने अपने बेटे का नाम रखा था मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर...

और क्रिकेट का मैदान गवाह है---सचिन ने बांसुरी की जगह बल्ला उठाया तो बाऊंड्री की तरफ पूरी लचक के साथ दौड़ती हर गेंद देखने वाले की आंख में एक सिंफनी की तरह उतर गई...हां...सचिन क्रिकेट के संगीतकार हैं...उनका हर शतक सात सुरों में पिरोया क्रिकेट का नया सरगम है...

मैदान पर क्रिकेट के खेल को संगीत में बदलने वाला ये शख्स ठीक इसी कारण मैदान से बाहर एक एक प्रतीक में तब्दील हो गया है...मध्यवर्गीय परिवार की संतान सचिन आज अपने शतकों से एक मध्यवर्गीय राष्ट्र के जवान होते सपनों को राह दिखाता है...ये सचिन कभी बूढ़ा नहीं होता....मध्यवर्ग के सपनों में ये सचिन हमेशा किशोर बना रहता है...कम से कम सचिन को लेकर बनने वाले विज्ञापन यही कहते हैं...
सचिन के बल्ले से निकले हैं टेस्ट क्रिकेट में 41 शतक...सचिन के नाम हैं वन डे क्रिकेट के 42 शतक...टेस्ट क्रिकेट में 12 हजार रनों का पहाड़ पार करने वाला अकेला हिन्दुस्तानी सचिन रमेश तेंदुलकर है...और वन डे क्रिकेट में 16 हजार रनों का एवरेस्ट लांघने वाला भी पहला क्रिकेटर...

लेकिन सचिन को लेकर बनने वाले विज्ञापनों में इन कीर्तिमानों का कोई जिक्र नहीं होता...विज्ञापनों में कैद है किशोर होता सचिन...बच्चों को तंदुरुस्ती के राज बताता सचिन....किशोरों को लूजर और विनर के बीच का फर्क बताता सचिन...ये विज्ञापन आपको याद कराते हैं 14 साल के सचिन को...जो बतौर बेस्ट प्लेयर मुंबई क्रिकेट टीम में शामिल हुआ..ये विज्ञापन याद दिलाते हैं आपको 16 साला किशोर सचिन की जो कराची के मैदान पर वकार यूनुस की आग उगलती गेंद झेल रहा था...ये विज्ञापन याद दिलाते हैं आपको 17 साल के सचिन की जो टेस्ट क्रिकेट मैदान पर सबसे कम उम्र में अपने बल्ले से शतकों की तहरीर लिख रहा था...हां..क्रिकेट के मैदान से बाहर सचिन की सारी छवियां एक किशोर होते बच्चे के करिश्मे की छवियां हैं...और अब उन छवियों में बदलाव आ रहा है... वो सचिन, जिसका लड़कपन हर तस्वीर से झलकता था... उसकी मैच्योरिटी दिखाई देने लगी है...
तभी वो सचिन विज्ञापन में भी खुद को पहले से ज्यादा भारतीय करार देता है... वो सचिन, जो अब आम लोगों से ज्यादा करीब दिखाई देता है... जिसके लिए जिंदगी खेल से कहीं आगे बढ़ती है...
ये वो बदलाव हैं, जो शायद सचिन के क्रिकेट करियर को बढ़ाएंगे... उन्हें खेल में और आनंद देंगे...
सफलता के शिखर पर खड़े सचिन अब शौहरत के लिए तमगों और तारीफ़ों के मोहताज नहीं रहे... बल्कि, इस जीनियस की मौजूदगी म्यूजियम की शान बढ़ाएगी... वाकई जो सचिन ने हासिल किया है उसका कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलेगा...
क्रिकेट की पिच पर गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाता सचिन.... यही अक्श उभरता है इस सितारे का दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों के जहन में...
और यही अक्श बनेगा तुसाद की शान... जेन्टलमेन्स गेम के व्हाइट में क्रिकेट का जेन्टलमेन सचिन... तकरीबन सवा करोड़ रुपए की लागत से मोम में ढलेगा क्रिकेट के इतिहास को हर दिन ने रिकॉर्ड्स में ढालने वाला ये सितारा...

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