जीवन का तानाबाना

पूजा शर्मा

एक मुहब्बत का, एक नफरत का
एक इनायत का, एक शिकायत का
एक दर्द का , एक सुकूं का
एक आदत का, एक रवायत का
एक आंसू का, एक मुस्कराहट का
एक रश्क का , एक इबादत का
एक जिंदगी का, एक क़ज़ा का
रोज़ मैं इन धागो का जाल बुनती हूं
कभी उलझती हूं मैं इनमें
कभी इनको मैं उलझाती हूं

टिप्पणियाँ

neeshoo ने कहा…
पूजा जी ,बहुत ही अच्छी रचना , कम शब्दों में आप ने बाध रखा है ।
ऐसे ही लिखती रहिये.......
Mrs. Asha Joglekar ने कहा…
बहुत अच्छी रचना । छोटी लेकिन अर्थपूर्ण ।
Rajesh Roshan ने कहा…
अर्थपूर्ण रचना

Rajesh Roshan
mamta ने कहा…
संक्षेप मे आपने इस रचना मे बहुत कुछ कह दिया है ।
अबरार अहमद ने कहा…
gindagi isi ka nam hai. aur yahi hakikat hai. is andaj se ise pesh karne ke lie badhai.

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