मुशर्रफ से सौदेबाज़ी

नीरज बधवार
सरबजीत मामले पर बात करने के लिए परवेज़ मुशर्रफ एक गुप्त दौरे पर दिल्ली आए। मुशर्रफ-हां तो बताएं क्या योजना है आपके पास? भारतीय अधिकारी-(थोड़ा रूकते हुए) जी, हम इस सिलसिले में एक समझौता करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि आप सरबजीत दे दें, और उसके बदले के पी एस गिल ले लें। मुशर्रफ चिल्लाते हुए खड़े हो जाते हैं-लाहौल विलाकुव्वत, इस वाहियात बात के लिए आपने हमें दिल्ली बुलाया है, अब हम यहां एक पल भी नहीं रूक सकते, टेम्पो बुलाओ।
भारतीय अधिकारी-आप बैठिये तो सही। अगर गिल मंजूर नहीं तो हम और ऑप्शन दे सकते हैं। हमारे यहां 'नगीनों' की कमी नहीं है। ऐसा करें आप सरबजीत दे दें, और राखी सावंत ले लें। मुशर्रफ-देखिए, मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आप समझौता करना चाह रहे हैं, या ज़्यादती? के पी एस गिल और राखी सावंत लेने से अच्छा है आप हमें शक्ति कपूर दे दें। भारतीय अधिकारी-सीरियसली! मुशर्रफ-आप इतना मज़ाक भी नहीं समझते। हिंदुस्तान की तरह पाकिस्तान में भी सर्कस का धंधा चौपट हो चुका है, चिड़ियाघरों पर ताले लगे हैं, ऐसे में आप बताएं, क्या करेंगे हम शक्ति कपूर का?
इंडियन म्यूज़िक की पाकिस्तान में बड़ी धूम है, उसकी कोई हस्ती हमें ऑफर करें, लता मंगेशकर या सोनू निगम के हमारे यहां बहुत फैन्स हैं, उनके बारे में सोचिए। भा.अ.-देखिए, उन्हें तो हम हरगिज़ नहीं देंगे। आपको तो अच्छी आवाज़ से मतलब है न, ऐसा करें आप हिमेश रेशमिया ले लें। मुशर्रफ-देखिये हमें नगमे सुनने हैं, मस्जिदों से कौएं नहीं उड़वाने। ऐसा करें आप हमें अमिताभ बच्चन दे दीजिए।भा.अ-मुशर्रफ साहब, अमिताभ को दे भी दिया तो आप लेंगे नहीं। मुशर्रफ-वो क्यों? भा.अ- वो इसलिए क्योंकि उनके साथ अमरसिंह फ्री है।मुशर्रफ-तौबा, तौबा, तौबा....खैर छोड़ें....ये बताएं हिंदुस्तानी क्रिकेट टीम आजकल काफी अच्छा खेल रही है, ..सचिन, सौरव या द्रविड़ में से कोई मिल जाए तो...भा.अ-जिन खिलाड़ियों के आप नाम ले रहे हैं ये सब तो एक-आध साल में रिटायर हो जाएंगे, मेरी मानें आप आशीष नेहरा ले लें, उसके साथ कॉम्बो ऑफर में मुनाफ पटेल भी ले सकते हैं....आप भी क्या याद रखेंगे चलिए बालाजी भी इनके साथ दिया।
मुशर्रफः(जो अब तक आपा खो चुके थे) मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आप खिलाड़ियों के नाम गिना रहे हैं या मरीज़ों के। इन खिलाड़ियों के साथ तो आपको एक डॉक्टर भी देना पड़ेगा। भा.अ.-हां दे देंगे न, आप भारत के सबसे मशहूर डॉक्टर को ले लीजिए। मुशर्रफ-कौन, डॉक्टर त्रेहन? भारतीय अधिकारी-नहीं, डॉक्टर अमित!

टिप्पणियाँ

संजय तिवारी ने कहा…
बहुत अच्छा विषय लिया है लेकिन प्रस्तुति थोड़ी कमजोर. थोड़ा और मांजकर लिखते तो जोरदार व्यंग्य होता.
ok sir, नीरज तक पंहुचा दूंगा
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