जल्द ही लागू होगा पाकिस्तान मे फौजी शासन

पाकिस्तान में जिस हालात में लोकतंत्र काम कर रहा है...वो बहुत ज्यादा उम्मीदें नही जगाता...ज़रदारी बहुत उम्मीदे के साथ आये थे...लेकिन मुंबई हमलो ने पाकिस्तान के राजतंत्र की कई परतो को एक बार फिर से खोल दिया है...मुंबई पर आतंकवादी हमलो के बाद जिस तरह से पाकिस्तान पर दबाब पडा है...और वंहा से आते राजनेताओं के बयान हकीकत बयां करते है...भारत यदि कोई मांग रखता है...तो कई जबाब आते है....जरदारी कुछ बोलते है....प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी कुछ और विदेश मंत्री कुछ और अलापते है...लेकिन जिस शख्स की चलती है...वो है...सेनाप्रमुख कयानी...जिस आईएसआई चीफ को भारत भेजने के लिये पाकिस्तान तैयार हो गया था,वो कयानी के हल्के इशारे से नही आ पाये...कयानी ने सिर्फ ये कहा कि -कल को हिंदुस्तानी मुझे मागेंगे....तो....- बस आईएसआई प्रमुख पाशा का भारत का टिकट कैंसल हो गया....उसके बाद जिस तरह से बयान दर बयान पाकिस्तान के हुक्मरानो के बयान बदले है, उसने इस मुल्क की दुनियां भर में किरकिरी की है...कोई भी गैरतमंद पाकिस्तानी अपने मुल्क का ये हाल देखकर दुखी ही होगा...पहले दहशतगर्दो ने देश का बेडागर्क किया है...फिर ये नेता...कल तक गले में बांहे डालकर धूमने वाले नवाज शरीफ और जरदारी एक दूसरे को गालिंया दे रहे हैं...इसने पाकिस्तान में ही कई तबकों को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है...कि इनसे बेहतर तो फौज ही थी...कम से कम फौज के जनरल की चलती भी थी, और उसकी सब सुनते भी है...यंहा तो प्रघानमंत्री गिलानी अपने राष्टीय सुरक्षा सलाहकार दुर्रानी को बर्खास्त कर देते है...और जरदारी को खबर मीडिया से लगती है...लिहाजा ये संदेश साफ होता जा रहा है कि देर सबेर पाकिस्तान में फौजी शासन लागू होगा ही...कियानी जानते हैं कि उनकी क्या औकात है...और क्या हो सकती है...वो अमेरिका के नज़दीक है...फौज पर उनका पूरा नियंत्रण है...उनकी छवि साफ है...लेकिन पावर एक वो नशा है, जिसे हर पाकिस्तानी जनरल पालता है ..लिहाजा दुनिया को तैयार रहना चाहिये कि फौज जल्द आयेगी....

टिप्पणियाँ

विनय ने कहा…
बहुत सुन्दर प्रस्तुतिकरण

---आपका हार्दिक स्वागत है
गुलाबी कोंपलें

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